हम उस ह़ुसैन की मह़फ़िल सजाए जाते हैं
हुज़ूर कांधे पे जिनको बिठाए जाते हैं।
ह़ुसैन आपके भाई ने ये कमाल किया
बगैर हाथों के परचम उठाए जाते हैं।
जनाबे हज़रते वारिस के आस्ताने पर
नबी के नाम के टुकड़े खिलाए जाते हैं।
सिवाए हज़रते असग़र के और कोई नहीं
गले पे तीर है और मुस्कुराए जाते हैं।
यकीन न हो तो अजमेर जाके देख आओ
वहां इशारे से दरिया बहाए जाते हैं।
हुसैन पाक बचपन भी बे मिसाल हुआ
कि उनको मुस्तफा झूला झुलाए जाते हैं।
जहां किसी से भी फतेह न जंग हो पाए
तो उस मकाम पे हैदर बुलाए जाते हैं।
किसी भी हाल में अज़हर वो डर नहीं सकता
जिसे हुसैन के किस्से सुनाए जाते हैं।